जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग.)
विषय - सुभाषचंद्र बोस
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - नेताजी सुभाषचंद्र बोस
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// नेताजी सुभाषचंद्र बोस //
ने - नेता अद्भुत अद्वितीय जो ,
सबके प्यारे दुलारे हैं ।
आजादी के शेर सुभाष ,
हृदय सम्राट हमारे हैं ।।
ता - तारे वे माँ प्रभावती के ,
जानकीनाथ बोस के लाल ।
कटक में जन्मे वीर सपूत ,
अंग्रेजी सत्ता के महाकाल ।।
जी - जीवन देश - धर्म हेतु ,
निर्भीक व अनुकरणीय ।
आई.सी.एस. की परीक्षा में ,
उत्तीर्ण हुए जो प्रशंसनीय ।।
सु - सुन्दर ऊँची योग्यता पर ,
कभी न की गुलामी ।
स्वतंत्रता के समर में ,
आये बनकर सुनामी ।।
भा - भाने लगी जनता को अति ,
नेताजी के कार्य - स्वभाव ।
आजादी के आंदोलन में ,
नया मोड़ आया बदलाव ।।
ष - षड्यंत्र और मतभेदों से
भारत छोड़ विदेश गए ।
ब्रिटिश शासन को भगाने ,
आजाद हिन्द फौज बनाए ।।
चं - चंदा और सहयोग मिला ,
जनता का भरपूर प्यार ।
"दिल्ली चलो" के नारे से ,
संगठन को किये तैयार ।।
द्र - द्रष्टा भावी भारत के ,
आजादी के मतवाले ।
आध्यात्मिक दर्शन प्रेमी ,
ओजस्वी गरम खून वाले ।।
बो - बोले-"मैं तुम्हे आजादी दूँगा ,
तुम मुझे दो खून" ।
तभी खिलेगा देश में ,
आजादी का नव प्रसून ।।
स - सन्देह सभी को आज भी ,
नेताजी के मौत पर ।
करते हैं आदर से नमन ,
एक सौ पच्चीसवीं जयंती पर ।।
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