Saturday, January 23, 2021

लीलाधर कुम्हार की रचना- सुभाष चंद्र बोस

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग.)
विषय - सुभाषचंद्र बोस
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - नेताजी सुभाषचंद्र बोस
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// नेताजी सुभाषचंद्र बोस //

ने - नेता अद्भुत अद्वितीय जो ,
     सबके प्यारे दुलारे हैं ।
     आजादी के शेर सुभाष ,
     हृदय सम्राट हमारे हैं ।।

ता - तारे वे माँ प्रभावती के ,
      जानकीनाथ बोस के लाल ।
      कटक में जन्मे वीर सपूत ,
      अंग्रेजी सत्ता के महाकाल ।।

जी - जीवन देश - धर्म हेतु ,
       निर्भीक व अनुकरणीय ।
      आई.सी.एस. की परीक्षा में ,
      उत्तीर्ण हुए जो प्रशंसनीय ।।

सु - सुन्दर ऊँची योग्यता पर ,
      कभी न की गुलामी ।
      स्वतंत्रता के समर में ,
      आये बनकर सुनामी ।।

भा - भाने लगी जनता को अति ,
       नेताजी के कार्य - स्वभाव ।
       आजादी के आंदोलन में ,
      नया मोड़ आया बदलाव ।।

ष - षड्यंत्र और मतभेदों से
     भारत छोड़ विदेश गए ।
     ब्रिटिश शासन को भगाने ,
     आजाद हिन्द फौज बनाए ।।

चं - चंदा और सहयोग मिला ,
      जनता का भरपूर प्यार ।
      "दिल्ली चलो" के नारे से ,
      संगठन को किये तैयार ।।

द्र - द्रष्टा भावी भारत के ,
     आजादी के मतवाले ।
     आध्यात्मिक दर्शन प्रेमी ,
     ओजस्वी गरम खून वाले ।।

बो - बोले-"मैं तुम्हे आजादी दूँगा ,
      तुम मुझे दो खून" ।
      तभी खिलेगा देश में ,
     आजादी का नव प्रसून ।।

स - सन्देह सभी को आज भी ,
      नेताजी के मौत पर ।
     करते हैं आदर से नमन ,
     एक सौ पच्चीसवीं जयंती पर ।।

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