जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-मल्लाह
विधा- कविता (मुक्त छंद)
जीवन एक लम्बी यात्रा,
सुख -दुख दो किनारे हैं|
मंझधार पर है मेरी नैया,
बस मल्लाह के सहारे हैं|
कभी गम की आंधी चले,
साहस ही एक सहारा है|
मल्लाह कभी नहीं थकता,
हरपल नई आस जगाता है|
हिचकोले खाते भंवर जाल से
सबको वो हरदम बचाता है|
हे ईश! तुम मल्लाह हो मेरे,
मुझे आंधी से बचाये रखना|
गर डगमगा जाये मेरी नैया,
आस का डोर थमाये रखना|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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