Friday, January 15, 2021

कांकेर से मीराआर्ची चौहान की रचना- मल्लाह

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-मल्लाह
विधा- कविता (मुक्त छंद)

जीवन एक  लम्बी यात्रा,
  सुख -दुख  दो किनारे हैं|

 मंझधार पर है मेरी नैया,
   बस मल्लाह के सहारे हैं|

कभी गम की आंधी चले,
  साहस ही एक सहारा है|

मल्लाह  कभी नहीं थकता,
  हरपल नई आस जगाता है|

हिचकोले खाते भंवर जाल से
   सबको वो हरदम बचाता है|

हे ईश! तुम मल्लाह हो मेरे,
  मुझे आंधी से बचाये रखना|

गर डगमगा जाये मेरी नैया,
  आस का डोर थमाये रखना| 

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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