Friday, January 15, 2021

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- मल्लाह

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
      संबलपुर,जिला-कांकेर,( छ. ग.)  
          विषय-मल्लाह
            दिनाँक-15.01.21
*~~~~~~~~~~~~~~~~*
              *मल्लाह*

मेरा जीवन पार लगाने वाले 
अमर अविनाशी मल्लाह,
तुमसे जुड़ी रहती बिन डोरी 
के मुँह से निकले ना आह।

बीच मंझधार में प्रभू 
तुम आते हो बन पतवार,
कैसे कहीं और देखूँ, 
तुम बिन दिखता ना आधार।

जीवन को देने वाले कैसे 
बताऊँ तुम ही खेवनहार,माँझी, 
नाविक,मल्लाह क्या नाम दूँ 
तुम ही पालनहार।

जीवन की ऊँची-नीची डगर 
में हाथ थामते हर बार,
तुम ही आदि और अंत,
तुम बिन सूना है संसार।

भवसागर में पड़ा राग-द्वेष,
माया,मोह से भरा कर दो उपकार,
भव की लहरों में डूबता उतराता हूँ ,
तब नौका लगाते पार।

तुम्हारा ऋण कैसे उतारूँ 
ओ मेरे तारणहार,
तुम बिन चल ना सकूँगा 
तुम्हीं संभालों मेरे करतार।

निशदिन वन्दन करुँ, 
अर्चन है बारम्बार,
मुझे मत बिसराना प्रभू 
तुम बिन मैं निराधार।

      नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...