Friday, January 15, 2021

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- केंवट

रचनाकार- अनुरमा शुक्ला
स्थान- दुर्ग ( छ.ग.)
विधा- कविता
शीर्षक- *रामभक्त केंवट*

हों जायें भवसागर पार
प्रभु स्मरण जो करें अपार,

ऐसे कृपालु रामचंद्र ने
किया मल्लाह का मनुहार,

जाना था गंगा के उस ओर
कहा नैया ले आओ निषाद,

कहा केंवट ने, जाना नहीं उस पार
बिछड़ना रामचंद्र से हमें नहीं स्वीकार,

छोड़ हमें कभी जाना नहीं
लक्ष्मण भले दे तीर से मार,

पुण्य चरण धूली की खातिर
प्रभू चरण लूं प्रथम पखार,

हठ में उसके प्रेम-भक्ति थी,
आनंद लेने लगे राम, उन्हे निहार,

ऐसे राम-भक्त थे, निषाद परिवार
राम-सीता थे, जिनके पालनहार,

काश कोई मल्लाह अब ऐसा भी आये,
उबारे जीवन नैया,जो फँसे बीच मँझधार ।।

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