स्थान -नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला -जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा ---कविता/आलेख
विषय --मल्लाह
शीर्षक --मल्लाह नदी के उस पार
मल्लाह मुझे नदी के,उस पार जाना है ।
मेरा यहां नहीं , वहां पर ठिकाना है ।
ले आओ पतवार तुम,न देखो मझधार तुम ।
न सोचो बेकार तुम, उसका न जमाना है ।
धारों से तुम खेलते, और इस प्रकार बोलते ।
क्यों भेद नहीं खोलते,ये क्या बहाना है ।
भूल जाओ अपनी समस्या, जीवन एक तपस्या ।
सुनो यह बात अवश्य , तूफान को भी आना है ।
हर पल रहना चाहिए तैयार, नहीं मानना चाहिए हार ।
अवसर मिलता है एक बार,हर समस्या से टकराना है ।
कैसे तुम हो नाव वाले ,नाव का समुचित ज्ञान नहीं ।
हर कोई पेशे में दक्ष रहता, तुमको भी बताना है ।
पथिक तो यहां आकर, थकेगा तुम्हें समझाकर ।
मैं थकित और चकित हूं, वापस मुझे नहीं जाना है ।
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