Thursday, January 28, 2021

गोमती सिंह कृत आलेख- छेरछेरा

रचनाकार- गोमती सिंह
जिला--कोरबा, छ.ग.
विषय- छेर छेरा 
विधा--आलेख 
शीर्षक- " छेर छेरा"
-------छेर छेरा हमारे छ.ग. का बहुत ही उत्तम और उत्साह से मनाए जाने वाला त्यौहार है। यह पौष महीने के अंतिम दिन यानिकी पूरणिमा के दिन मनाया जाता है ।यह त्यौहार मनाने के पीछे ये मान्यता है कि गाँव में सभी किसान पौष महीने के आते तक अपने खेतों मे बड़ी मेहनत और लगन से उगाए फसलों को काट कर मिसाई करके अपने अपने घर के गोदाम मे रख चुके होते हैं । हालांकि आजकल तो विभिन्न प्रकार के मशीनों का युग आ गया है जिससे खेतों में ही मशीन से काटकर धान के पौधे से सीधे बीज निकली जा सकती है जिससे मेहनत या परिश्रम करनें की आवश्यकता नही होती । हाँ मगर फसल घर जाने की खुशी तो अपार होती है । इस खुशी का अंदाजा किसान लोग ही बेहतर लगा सकते हैं । कहने का तात्पर्य यह है कि अपने इसी खुशी को दर्शाने के लिए और आपस में मित्रता और सौहार्द लाने के लिए आज के दिन सभी अपने अपने घर के दरवाजे में टुकना में धान भर कर बैठे रहते हैं तथा सभी घरों के बच्चे ,जवान बुजुर्ग सभी लोग एक दूसरे के घर वहीं दरवाजे के पास जाकर छेर छेरा ऐसा उच्चारण बड़े उत्साह के साथ करते हैं तब उन्हें मुठ्ठी भर धान उनके पात्र मे दे दिया जाता है । इस तरह यह त्यौहार आपसी भाईचारा , मित्रता और हंसी मजाक को बनाए रखने वाला बहुत ही मजेदार त्यौहार है । 
       ।।इति।। 
     " गोमती सिंह"
    कोरबा, छ. ग.

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