जिला - बलौदाबाजार ( छ . ग. )
विषय - रूह
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - अपने को आत्मा जानो
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//अपने को आत्मा जानो //
अजर अमर अविनाशी आत्मा ,
अपने आपको जानो जी ।
सत् चित् आनन्द रूप शाश्वत ,
स्वयं सिद्ध पहचानो जी ।।
दुःखरूप परिवर्तनशील
मिथ्या देह क्षणभंगुर है ।
रोग शोक भय जन्म जरा ,
मृत्यु भी इसके लक्षण है ।।
पंचतत्व मन बुद्धि अहंकार ,
मायिक जड़ अष्टधा प्रकृति है ।
ऐसे अप्रिय अधम शरीर में ,
आत्मा की सत्ता चलती है ।।
वही आत्मा चेतन हो तुम ,
शुद्ध बुद्ध इन्द्रियातीत ।
मन विचार कर्म के साक्षी ,
आदि अंत से सर्वथा रहित ।।
सत्य सनातन शिव सुंदर ,
अचल अटल अबदल स्वरूप ।
परमात्मा में नित्य प्रतिष्ठित ,
ऐसी आत्मा है निज रूप ।।
रूह आत्मा जो भी कह लो ,
है अभिन्नता ईश्वर से ।
फिर भी प्राणी व्यथित है ,
जाने किस घन चक्कर से ??
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