स्थान-- नवापारा खुर्द सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
विधा ----कविता /आलेख
विषय ---नज्म
शीर्षक ----कविता लिखे जा रहे
कविता लिखे जा रहे,आज भी कई जमाने से ।
शब्द शब्द को जोड़कर,बन जाते ये बनाने से ।
विषय इस पर अपने होते, जीवन के कुछ सपने होते ।
साहित्य के धरातल में, हर्षित हो जिसे सभी हैं बोते ।
सरल भी कठिन भी एक पल नहीं, वर्षों लगते बनाने से ।
इसकी है कई विधाएं, जिस पर बनते बनाये जाते ।
कभी विरह कभी मिलन की, बातों से सजाये जाते ।
श्रृंगार भी होता जैसे नर नारी , मजा आता सजाने से ।
सुख पर भी लिखे जाते, दुःख का भी खूब वर्णन होता ।
माया मोह धन दौलत काया,बाग बगीचे नदी वन होता ।
एक जन्म पर्याप्त नहीं रहता ,समूचा इसको बताने से ।
ईश्वर की भी गाथाएं हैं, उनसे बहुत रखते आशाएं हैं ।
उनका होता जग में अवतार , कष्टों से सारे बचाएं है ।
कोई छूटा नहीं यहां है,उनको अपनी ब्यथा सुनाने से ।
सागर की तरह पड़ा है यह, हिमालय से भी बड़ा है यह ।
पूरी धरती पर फ़ैल जाएगी, आसमां को छू जाएगी ।
इतने शब्द भरे हैं हर कोई निकाल रहा खुद खजाने से ।
कोई यश के लिए बंधा, कोई धन के लिए बांध रहा ।
किसी को प्यार मिला ,इसी को सब कुछ मान रहा ।
पानी में भी लगाते आग, कुछ नहीं लगता बुझाने से
जैसी प्रकृति वैसी कविता,अनवरत चलती यह रहेगी ।
गंगा यमुना पावन धार की जैसे सबको पावन करेगी ।
हर कोई उत्सुक मिलते,सीख जाते सब सीखाने से ।
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