जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - नज़्म
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - मेरे प्रभु
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// मेरे प्रभु //
मेरे प्रभु मेरे हैं ,
मेरे अपने प्यारे ।
मेरे सर्वस्व वही ,
सूरज चाँद तारे ।।
मेरे प्रभु राम हैं ,
सृष्टि के नियामक ।
रोम - रोम रमनेवाले ,
मोक्ष प्रदायक ।।
मेरे प्रभु कृष्ण हैं ,
आनन्द के दाता ।
पूर्ण अवतारी जो ,
गीता ज्ञान प्रदाता ।।
मेरे प्रभु हरि हैं ,
पाप कष्ट हरते ।
भक्ति प्रीति तृप्ति ,
सबके उर भरते ।।
मेरे प्रभु शिव हैं ,
परम कल्याणकारी ।
स्वयं विष पान करते ,
सर्व हितकारी ।।
मेरे प्रभु एक हैं ,
नाम रूप अनेक ।
आत्मा और परमात्मा ,
वही एक नेक ।।
मन मंदिर में प्रभु ,
हृदय के करीब ।
साँसों की माला है ,
नाम जप की रीत ।।
प्रभु कथा सत्संग ,
ध्यान भजन अर्चना ।
बिन फेरे तेरे प्रभु ,
यही पुकार प्रार्थना ।।
प्रभु ही माता - पिता ,
बन्धु सखा गुरु ।
प्रभु चरण - धूल माथे ,
क्यों चिन्ता करूँ ??
गले पड़ूँ प्रभु के ,
जो केवल अपना है ।
प्रभु मेरे तारणहार ,
हीरे मोती गहना है ।।
मेरे प्रभु की लीला ,
गुण और स्वभाव ।
मेरे प्रभु की महिमा ,
अद्वितीय प्रभाव ।।
संसार तो सपना है ,
प्रभु ही एक सार ।
परम ठोस सत्य प्रभु ,
बाकी सब असार ।।
प्रभु की सत्ता से ,
माया का प्रपंच है ।
मेरे प्रभु के बिना ,
सब कुछ निरंक है ।।
प्रभु में प्रभु ही ,
सर्वत्र समाये हैं ।
प्रभु की ही चेतना ,
प्राणवान किये हैं ।।
प्रभु से अभिन्न हूँ ,
और मैं क्या कहूँ ?
"मैं" नहीं प्रभु से ,
हाथ मिलाया करूँ ।।
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