पेंडरवानी , बालोद , छत्तीसगढ़
विषय - सायक
शीर्षक - शब्द सायक
शब्द सायक
मुख तूणीर से शब्द सायक ,
करते घात - प्रतिघात हो ,
कभी शीतलता से भरे अंक में ,
कभी बढ़ा दे बातों - बात हो ,
चुभ जाए तो घाव कर दे ,
बना रिश्तों में गांठ हो ,
पर सदा ए शब्द सायक ,
सिखलाता नई इक पाठ हो ,
कभी उतरकर जिगर में ,
अपनो सा एहसास दे ,
उलाहना भी है , मरहम भी ए ,
कभी यौवन सा ए मोहपाश दे ,
है कितना प्रभावशाली ,
कैसे ? बतलाऊँ तुम्हें ,
जीवित हृदय में शब्द सायक ,
जीवन को जिंदा लाश दे ,
रणधीरों में बल नही ,
मचा दे जो हलचल नही ,
तरकश मुख पर रसना के तीर सा,
न आज है न कल नही ,
- - शैलेन्द्र चेलक - -
VeeV nice sir jiii
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