जिला-कांकेर,छग
शीर्षक- भूख
विधा-आलेख
भूख का संबंध शरीर से है। शरीर के संचालन के लिए भोजन की आवश्यकता होती है ।तत्पश्चात् कार्य करने के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है ।क्षुदा शांत करने के लिए मनुष्य शारीरिक और मानसिक श्रम करता है,जिससे पैसे मिलते हैं ।विभिन्न भौतिक सुविधाएं प्राप्त कर मनुष्य आराम की जीता है ।
आज भूख के मायने बदल गये हैं ।भौतिक सुविधाओं की भूख आज मनुष्य को अंधा बना रही है ।मनुष्य नैतिक पतन की ओर अग्रसर होता जा रहा है ।अनैतिक तरीके से धन कमाने की लालसा मनुष्य को निकृष्ट बना दिया है ।
भूख का सही मायने में व्याख्या एक निर्धन व्यक्ति ही कर सकता है ,जो भूखा रहकर भी मानसिक रूप से सुखी है ।
कोई दो जून की रोटी न मिलने से भूखा है ।कोई प्रेम का भूखा है,कोई सम्मान का भूखा है और कोई आत्म संतुष्टि का भूखा ।
आइए हमारे पास यदि पर्याप्त अन्न है तो हम एक भूखे को रोटी देने का संकल्प लें,ताकि कोई भूखा न रहे ।बिलखते बच्चे की भूख देखिए-
करोना काल में एक
कामवाली बाई की
नौकरी छूट गई।
उसका नन्हा नंदु
अच्छे खाने को
तरसता रहा ।
मां खाली पतीली
में सिर्फ पानी
पकाती रही ।
भूख में पानी
रात भर यूं
उबलता रहा ।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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