जिला--कोरबा
विषय--रुह
विधा--कविता
शीर्षक--रुहानी
----खुद के जैसा सभी को जानें ,हर एक काया में एक ही जैसा रुह बसते हैं।
अपना दुख दर्द तो सभी हैं जानें ,
औरों का दर्द महसूस करे ,ये एहसास रुहानी होती है ।
मेरी कलमधर्मिता यही हो ; दर्द आहतों की बयाँ करे ,
दर्द पराया जो पहचाने; वह गीत रुहानी होती है ।
मेरी रुह की प्यास यही है ; जरुरतमंदों की प्यास बुझा सकूँ ,
गर एक भी बंदा खुश हो जाए मुझसे; वह खुशी रुहानी होती है ।
अपना दर्द तो हर कोई जाने; औरों का दर्द महसूस करे ,ये एहसास रुहानी होती है ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छत्तीसगढ़
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