जिला-कांकेर,छग
शीर्षक- समंदर का किनारा
विधा-कविता (मुक्त छंद)
समुन्दर का किनारा,
सुंदर- सा नजारा ।
उगते-डूबते सूरज का
खूबसूरत-सा नजारा ।
लहराती- बलखाती वो
इठलाती ज्वारीय लहरें।
सीपी, व अनमोल रत्न
शंख व अनगिनत मोती ।
रत्नों को समेटे सागर,
शांत रहता है हमेशा।
रेत पर बैठे हिलोर लेते
जलराशि को निहारना ।
समुद्र की उस गहराई को
मन के पैमाने से मापना।
नई ताजगी दे जाता है,
जीवन के कैनवास को ।
पतवार थामे मांझी की
तरह है जीवन यात्रा ।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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