Wednesday, January 6, 2021

कांकेर से मीराआर्ची चौहान की रचना- समंदर का किनारा

रचयिता- मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक- समंदर का किनारा
विधा-कविता (मुक्त छंद)

समुन्दर का किनारा,
सुंदर- सा नजारा ।

उगते-डूबते सूरज का
खूबसूरत-सा नजारा ।

लहराती- बलखाती वो
इठलाती ज्वारीय लहरें।

 सीपी, व अनमोल रत्न
 शंख व अनगिनत मोती ।

 रत्नों को समेटे सागर,
 शांत रहता है हमेशा।

रेत पर बैठे हिलोर लेते
जलराशि को निहारना ।

समुद्र की उस गहराई को
मन के पैमाने से मापना।

नई ताजगी दे जाता है,
जीवन के कैनवास को ।

 पतवार थामे मांझी की
 तरह    है  जीवन यात्रा ।

मीराआर्ची‌ चौहान
कांकेर,छग
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