जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-शहद
विधा-कविता (मुक्त छंद)
मधुमक्खी,पराग कणों से बनाती अमीय शहद।
प्राकृतिक मिठास औषधि गुणों
का खान शहद।
मधुमक्खी के कठिन परिश्रम का
पर्याय शहद।
वनौषधियों में आयुर्वेद चिकित्सा की जान शहद।
मानव तुम हमेशा रहे आश्रित अन्य जीवों पर,
नहीं बना सकते शहद पर मीठा बोल शहद -सा।
ऐ मानव! तुम्हारे कसैले ,कड़वे
जुबान को सुधार,
जाने कितने अपने आहत होते
हैं वाणी के तीर से।
क्षणिक है जीवन वाणी में अब तो
मधुरस घोल।
शहद-सा मीठा बोल मनवा कड़वे
शब्द न बोल।।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
------------------------------------
No comments:
Post a Comment