Saturday, January 2, 2021

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- शहर

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - शहद
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - शहद घोल के बोलो भाई
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     // शहद घोल के बोलो भाई //

शहद  घोल   के   बोलो  भाई ।
जग में कर लो  सबसे मिताई ।।

केवल  मधुर   प्रेम  व्यवहार ।
वश  में  कर   लेगा   संसार ।।

बाँटोगे   जब   सुख - सम्मान ।
दुनिया   देगी   उच्च    स्थान ।।

लाओ निज में शहद का स्वाद ।
खिलेगा  जीवन  जैसे  गुलाब ।।

सुंदर सात्विक हो विचार मन ।
करो प्रभु  का ध्यान - भजन ।।

झूठ  कपट  छल  निंदा  छोड़ो ।
सबके दिल को प्यार से जोड़ो ।।

सबको  समझो  अपने जैसा ।
चाहे  कोई  प्राणी हो  कैसा ??

शहद का  छत्ता है यह  जीवन ।
औरों की सेवा  ही  परम धन ।।

मानवीय  परहित  लोकाचार ।
वेद पुराण  सत्संग  का सार ।।

शहद  मधुरता  की   पहचान ।
जीवन में सुख - शांति प्रधान ।।

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