जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - शहद
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - शहद घोल के बोलो भाई
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// शहद घोल के बोलो भाई //
शहद घोल के बोलो भाई ।
जग में कर लो सबसे मिताई ।।
केवल मधुर प्रेम व्यवहार ।
वश में कर लेगा संसार ।।
बाँटोगे जब सुख - सम्मान ।
दुनिया देगी उच्च स्थान ।।
लाओ निज में शहद का स्वाद ।
खिलेगा जीवन जैसे गुलाब ।।
सुंदर सात्विक हो विचार मन ।
करो प्रभु का ध्यान - भजन ।।
झूठ कपट छल निंदा छोड़ो ।
सबके दिल को प्यार से जोड़ो ।।
सबको समझो अपने जैसा ।
चाहे कोई प्राणी हो कैसा ??
शहद का छत्ता है यह जीवन ।
औरों की सेवा ही परम धन ।।
मानवीय परहित लोकाचार ।
वेद पुराण सत्संग का सार ।।
शहद मधुरता की पहचान ।
जीवन में सुख - शांति प्रधान ।।
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