स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- छंद मुक्त कविता
शीर्षक -समंदर का किनारा"
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समंदर का किनारा
स्वच्छंद और आवारा
थपेड़ों का आलिंगन
मुस्कुराता फिर भी बेचारा
अंकुश नहीं कोई
फिर भी साथ है
अथाह सागर समेटे
खड़ा रहता अकेला
गहरा है समंदर
ले आता बवंडर
मुस्कुरा के झेले
देखो यह किनारा
किनारे का समंदर
या समंदर का किनारा
साथ है युगों से
प्यार है इस कदर
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