Wednesday, January 6, 2021

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- समंदर का किनारा

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
    विषय - समन्दर का किनारा
     विधा - छंदमुक्त कविता 
   शीर्षक - " समन्दर का किनारा "
--------------------------------
कितना सुन्दर है ये नजारा। 
समन्दर का ये मनमोहक किनारा। 
मेरे अकेलेपन का ये सहारा। 
शुकुन देता मुझे ढेर सारा।। 

चमकता सूरज जब तुझसे उगता है। 
रोशनी चारों ओर बिखेरता है। 
समन्दर के लहरों में अपनी, 
ऊष्मा-प्रहार फिर ओ करता है।। 

ललिमा लिए जब शाम को, 
सूरज समुद्र में खो जाता है। 
किनारा समुद्र का होता विलीन, 
घोर अंधेरा फिर छा जाता है।। 

देखो कश्ती चलाता ओ मल्हार, 
चीरते समन्दर की लहरों को। 
दूर यात्रा पर ओ चला जाता, 
अलविदा कहकर किनारा और शहरों को।। 

चाँदनी रात में समन्दर तेरा किनारा, 
चाँदी-सा पायल चमकती है। 
तेज लहरें किनारा पाकर, 
खनखन ओ खनकती है।। 

जब भी तन्हा खुद को पाता हूँ। 
तेरे ही पास चला आता हूँ। 
सुनाकर अपना दुःखड़ा तुझे, 
आँखों से आँसू बहाता हूँ।। 

कैसे बताऊँ मेरा क्या हाल है। 
महबूब बिना हाल बहुत बेहाल है। 
किनारा कर लिया उसने बेवफा होकर, 
बेवफ़ाई भी उसकी क्या कमाल है।। 

------------****----------------

मौलिक रचना ( स्वरचित ) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...