जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-गणतंत्र दिवस
विधा-कविता (मुक्त छंद)
हिमालय जिस देश का भाल है,
गंगाजल जिसके ह्रदय का हार ।
विन्ध्याचल करधनी है जिसकी,
सागर जिसका पांव पखारती ।
ऐसा देश जिसका संविधान बड़ा,
धर्म निरपेक्षता ,सहिष्णुता जहांँ।
हरे-भरे खेत लहलहाते हैं जहां,
नदियाँ व झरने निर्बाध है बहते।
विश्व गुरू के रुप में जाना जाता,
वसुधैव कुटुम्बम् ध्येय जिनका।
मजहब जिन्हें कभी नहीं लड़ाती,
शांति दूत है प्रेम का संदेश देता ।
मानवता का संदेश देता देश मेरा,
गणतन्त्र भारत है सबसे प्यारा ।
सबसे सुंदर गणतंत्र दिवस हमारा,
विजयी है विश्व में तिरंगा प्यारा ।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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