Monday, January 25, 2021

मीराआर्ची चौहान की रचना- गणतंत्र दिवस

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-गणतंत्र दिवस
विधा-कविता (मुक्त छंद)

हिमालय जिस देश का भाल है,
गंगाजल जिसके  ह्रदय का हार ।

विन्ध्याचल करधनी है जिसकी,
सागर जिसका पांव  पखारती ।

ऐसा देश जिसका संविधान बड़ा,
धर्म निरपेक्षता ,सहिष्णुता जहांँ।

हरे-भरे खेत लहलहाते हैं जहां,
नदियाँ व झरने निर्बाध है बहते।

विश्व गुरू के रुप में जाना जाता,
वसुधैव कुटुम्बम्  ध्येय जिनका।

मजहब जिन्हें  कभी नहीं लड़ाती,
शांति दूत है प्रेम का संदेश  देता ।

मानवता का संदेश देता देश मेरा,
गणतन्त्र भारत  है सबसे प्यारा ।

सबसे सुंदर गणतंत्र दिवस हमारा,
विजयी है विश्व में तिरंगा प्यारा ।

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
____________________

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...