स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला-जांजगीर --चाम्पा/छत्तीसगढ
विधा-कविता
विषय-दृष्टिकोण
शीर्षक-सब कुछ दृष्टिकोण से
सब कुछ दृष्टिकोण से , कुछ नहीं जोड़ तोड़ से ।
अगर विश्वास नहीं देखलो, आते हुए हर मोड़ से ।
सफलता उसको है मिलता ।
जिसका सोच अलग रहता ।
वास्तविकता को परखता ।
अंधेरे में भी है चमकता ।
जो चलता खुद के सोच से, दूर रहता जो दोष से ।
बदलते राह को समझे ।
निकलते आह को जाने ।
सम्हलते वक्त को रोके ।
उसमें सब कुछ झोके ।
जो न कराहे चोट से,जो न घबराये रोध से ।
आंसू को भी पी जाए ।
हंसी को भी त्याग दें ।
अकेला ही चलता जाए ।
सफल होकर ही दिखलाए ।
न लड़ खड़ाए लोग से,न भागे प्रयोग से ।
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