Monday, December 21, 2020

कोरबा से गोमती सिंह की रचना- मां की महिमा

रचनाकार--गोमती सिंह
विषय-- ममता 
विधा ---कविता 
शीर्षक -–-" माँ की महिमा" 
----–-

ममता   की  आँचल मे  पलते परब्रम्ह ,

 लेकर शिशु अवतार ।

माँ की महिमा  अनंत है ,

जिसका आर  न  पार ।

माँ की ममता गूंगे का गुड़ है 

जिसका नहीं  बखान  ।

संतानों के दिल मे बसते

माँ की  ममता श्रेष्ठ  महान ।

माँ .की ममता का जिक्र

न.वहाँ  मुनासिब,

जिसकी नहीं है माँ.

दर्द  इसका वो ही जाने 

जग में जिसकी नहीं  है माँ ।       

माँ की   ममता  की गठरी लेकर,

बेटी  जाती ससुराल ,

गठरी  खोलती  यादों की 

जब हो जाती निढाल ।

ममता बिना  यह जगत  है सूना ,

भूमि  मरू समान ।
         *****

      .  " गोमती सिंह " 
कोरबा छत्तीसगढ़

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