विषय-- ममता
विधा ---कविता
शीर्षक -–-" माँ की महिमा"
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ममता की आँचल मे पलते परब्रम्ह ,
लेकर शिशु अवतार ।
माँ की महिमा अनंत है ,
जिसका आर न पार ।
माँ की ममता गूंगे का गुड़ है
जिसका नहीं बखान ।
संतानों के दिल मे बसते
माँ की ममता श्रेष्ठ महान ।
माँ .की ममता का जिक्र
न.वहाँ मुनासिब,
जिसकी नहीं है माँ.
दर्द इसका वो ही जाने
जग में जिसकी नहीं है माँ ।
माँ की ममता की गठरी लेकर,
बेटी जाती ससुराल ,
गठरी खोलती यादों की
जब हो जाती निढाल ।
ममता बिना यह जगत है सूना ,
भूमि मरू समान ।
*****
. " गोमती सिंह "
कोरबा छत्तीसगढ़
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