स्थान ---नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा--कविता
विषय---ममता
शीर्षक---ममता की छांव
ममता की छांव को, बचाकर रखना ।
जीवन की बगिया सा, सजाकर रखना ।
हर रिश्ते में ममता की खजाना भरा हुआ ।
जीवन में जो काम आते निभाकर रखना ।
ममता की छांव अनेको मां बहन पिता भाई ।
चाचा चाची मामा मामी, मिल मिलाकर रहना ।
नजर पड़ने मत देना, इस पर किसी का ।
न टूटे कोई डाल तुम, छुपाकर रखना ।
पत्ते भी है काम के , गिरने से बचाना ।
हर मौसम बहार तुम,अपनाकर रखना ।
डालों में जो फूल है,खिले रहना चाहिए ।
न मुरझाए कभी भी, खिलाकर रखना ।
फूलों के बाद फल है, इसे तुम याद रखना ।
कोई नुकसान न पहुंचाए, बनाकर रखना ।
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