Thursday, December 24, 2020

महासमुंद से विनोद कुमार "जोगी" की रचना- काश की सच में सैंटा होता!!!!

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विषय :- क्रिसमस
विधा :- बाल कविता
शीर्षक :- काश की सच में सैंटा होता

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काश की सच में सैंटा होता,
सच होते जी सपने सारे।
रात में दिखते सूरज दादा,
दिन में दिखते झिलमिल तारे।

ज्यों ही माह दिसम्बर आता,
इच्छा लिखकर हम सो जाते।
जब उठते हम सुबह सबेरे,
मन पसंद हम चीजें पाते।

और क्रिसमस की रात जो आती,
रैनडियर पर सैंटा आते।
लाल पोटली में अपने वे,
रंग बिरंगे तोहफे लाते।

लंबी दाढ़ी लाल झिंगोला,
पहने आते बूढ़े दादा।
नन्हें नन्हें उपहारों संग,
दादा लाते खुशियां ज्यादा।

काश की सच में सैंटा होता,
सच होते जी सपने सारे।
धूम धड़ाका करते मिलकर,
रौशन होते सारे गलियारे।

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