जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-कविता
विधा-मुक्त छंद
भावनाओं को शब्द बनाना
इतना आसान नहीं होता ।
बजाते हैं महफिल में लोग,
यूं ही नही जमकर तालियां ।
दर्द को लेखनी से उकेरना,
यूं ही आसान नही होता ।
हौसले को ताक में रखकर,
दर्द को छुपाना पड़ता है ।
पीड़ा लावा बन पिघलती है,
शब्दों से ज्वाला निकलती है ।
जब दिल से आह निकलती है,
लेखनी यूं ही चल पड़ती है ।
जब दूसरों की दर्द महसूसते हैं,
भावनाएँ कविता बन जाती हैं ।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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