Thursday, December 17, 2020

कांकेर से मीराआर्ची चौहान की रचना- कविता

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-कविता 
विधा-मुक्त छंद

भावनाओं को शब्द बनाना
इतना आसान नहीं होता ।

बजाते हैं महफिल में लोग,
यूं ही नही जमकर तालियां ।

दर्द को लेखनी से उकेरना,
यूं ही आसान नही होता ।

हौसले को ताक में रखकर,
दर्द  को छुपाना पड़ता है ।

पीड़ा लावा बन पिघलती है,
शब्दों से ज्वाला निकलती है ।

जब दिल से आह  निकलती है,
लेखनी यूं  ही चल  पड़ती है ।

जब दूसरों की दर्द महसूसते हैं,
 भावनाएँ कविता बन जाती हैं ।

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग

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