स्थान- दुर्ग ( छ.ग.)
विधा - कविता
शीर्षक-
*कविता का सृजन*
मन की दबी भावनायें विशेष,
भेदती है जब अन्तर्मन को,
वाणी हो जब प्रतिबंधित,
दम घुटती अभिव्यक्ति हो,
भ्रष्टाचार ,अनीति, छल, द्वेष,
आक्रोश की ज्वाला भड़काती है,
शब्द-शब्द वाक्य बनकर तब
लेखनी से उकेरी जाती है,
स्वयं के अधिकार पहचानो,
अब तो अपना देश बचा लो
जन-जन में अलख जगाती,
नवचेतना जागृति लाती है
कविता का सृजन होते ही,
कागज भी बोल पड़ती है,
कवि हृदय की बातें तब
कलम से सुन ली जाती है ।।
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