स्थान- बनाई, तमनार ,रायगढ
विधा-कविता
शीर्षक- "सूर्य की किरण"
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अम्बर में आरुणि की लाली
किरणों की पौ निकलने ही वाली
तम को चीर खुश होती मतवाली
चिड़ियों की चहचहाहट डाली-डाली
अंधकार मूंह छिपा गया
देखकर सूर्य के किरणों की थाली
इतराता भँवर भी पहुंच गया
बगिया में फ़ूलों की क्यारी
किसान चल पड़ा खेतों में
देख लहराने लगी धान की बाली
सारी धरा सजी - संवरी सी लगे
जैसे बगियों को सजाता कोई माली
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