Thursday, December 3, 2020

रायपुर से एच-एस-अरमो की रचना- योग्यता

रचनाकार-एच-एस-अरमो ,अरमान ।
निवास-,बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
विषय-"योग्यता "।
विधा--कविता,छ्न्द मुक्त ।
शीर्षक - " योग्यता  "
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●}}}••▪योग्यता ▪••{{{●
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योग्य वही कहलाता---
जो मापदंडों में,खरा है उतरता ।

ज्ञान,शिक्षा व कौशल---
जहाँ होता है,उपयोग,
जो दिखा देता है,अपनी दक्षता,
वही होती है,उसकी योग्यता--।

हर रोजगार के लिए---
होती है,कुछ न कुछ--
न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता व अनुभव,
होता सब ,जिसके पास---
वही दावेदार बन सकता--।

सही योग्यता हासिल करने---
करना पड़ता है,कठिन परिश्रम,
बनाना होता है,सटीक लक्ष्य ,
तभी सफलता होती ,उसके पक्ष --।

योग्यता पाने के लिए--
योग्य गुरु व संस्था का,
हो ऐसा सटीक सानिंध्य,
तभी प्राप्त हो,ऐसी योग्य शिक्षा --।

योग्य बनने,रखोगे तुम--
हरदम धैर्य और संयम,
तभी मिलेगी,उचित मंजिल--।

कभी भी,करना ना तुम--
अपनी योग्यता का दुरुपयोग,
वरना एक न एक दिन--
होना पड़ता है,उसे मायूस --।

रौब बताने,काम निकलवाने,
कभी भी,गलत तरीके से--
अपनी योग्यता को,सिद्घ न करें,
वरना अपमानित हो सकते हो,
एक न एक दिन तुम भी--।

योग्यता एक पुरुस्कार के भाँति है,
दिलाए मान-सम्मान व रुतबा भी,
इसे बरकरार रखने व तराशने---
करना पड़ता है,कठोर परिश्रम 
और नवाचार का,बेहतर प्रयोग,
तभी निखरती है,जीवन की बगिया--।

लोगों की योग्यता को देख--
करना ना,कभी भी ईर्ष्या,
योग्य बनने की सोच लिए--
करते रहो,अपने में ऐसा बदलाव--।
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व्याख्या-उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि मानव को अपनी योग्यता पर अभिमान नहीं करना चाहिए और लक्ष्य हासिल करने के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहिए ।

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