स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा-कविता
विषय---सूरज की किरण
शीर्षक-सर्वमान सूरज
सूरज की पहली किरण, दिखे जब गगन ।
मिटे जग का अंधेरा, मिले नया जीवन ।
उड़ चले सारे पंछी,हवा भी चलने लगी ।
थप थप पानी की बूंद, पेड़ों से गिरने लगे ।
धरा पर इन्द्रधनुष, उतरे हो रहा मिलन ।
चमकते ओस की बूंद, जैसे मोतियां लड़ी ।
पड़ते ही सबकी नजर,ठहर जाये एक घड़ी ।
हाय कितना सुन्दर है,निकले मुंह से वचन ।
घरों में चहल-पहल,खुली खिड़की दरवाजे ।
अंदर तक झांकती हवा, दिलाती याद वादे ।
लगते सब अपने काम,लगा मन में लगन ।
हिल रहे पेड़ों के पत्ते ,ओस बूंद भी चमक रहे ।
खिल खिला रही धरती,खुशियां मन दमक रहे ।
दे रहे दिखाई सुंदर,नदी तालाब झरने मैदान वन ।
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