Wednesday, December 2, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- सूरज की किरण

नाम---गिरधारी लाल चौहान
स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा-कविता
विषय---सूरज की किरण
शीर्षक-सर्वमान सूरज

सूरज की पहली किरण, दिखे  जब गगन ।
मिटे  जग का अंधेरा, मिले  नया जीवन ।

उड़ चले सारे पंछी,हवा भी चलने लगी ।
थप थप पानी की बूंद, पेड़ों से गिरने लगे ।
धरा पर इन्द्रधनुष, उतरे हो रहा मिलन ।

चमकते ओस की बूंद, जैसे मोतियां लड़ी ।
पड़ते ही सबकी नजर,ठहर जाये एक घड़ी ।
हाय कितना सुन्दर है,निकले मुंह से वचन ।

घरों में चहल-पहल,खुली खिड़की दरवाजे ।
अंदर तक झांकती हवा, दिलाती याद वादे ।
लगते सब अपने काम,लगा मन में लगन ।

हिल रहे पेड़ों के पत्ते ,ओस बूंद भी चमक रहे ।
खिल खिला रही धरती,खुशियां मन  दमक रहे ।
दे रहे दिखाई सुंदर,नदी तालाब झरने मैदान वन ।

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