निवास-बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
विधा-कविता,छ्न्द मुक्त ।
विषय-"सूर्य की किरणें " ।
शीर्षक--"सूर्य की महिमा "
○○●||सूर्य की महिमा ||●○○
प्रभा-किरणों की लालिमा लिए---
होती है,भोर की शुरुआत ---।
चिड़ियों की चहचहाट सुनाई देती है,
गाँव में,पशुओं का घूमना -फिरना,
घर-आँगन की होवे ,साफ-सफाई ।
लोगों का,सेहत बनाने के लिए--
करते हैं,रोज सुबह सैर-सपाटा,
क्या बच्चेँ क्या बूढ़े व जवान ।
प्रातःकाल मछुआरे का जाल लिए,
मछलियाँ पकड़ने,जाते हैं--
नदी,नाले,तालाबों व सागर की ओर,
निकल जाता है,उस दिशा की ओर ।
शीत-ऋतु में,हो जाती हैं--
सूर्य की किरणें भी--
कुछ कम,ताप लिए होती ,
पर,प्रातः गरीबों को गर्मी देती ।
विटामिन डी की,कमियों को,
दूर करे,सूर्य की किरणें,
धूप में हैं,जो टहलते--।
घास-पूस ,तर्ण में--
जब रात में,गिरती है--
ओस की बूँद और दमकती हैं--
मानों असंख्य मोती को बिखेर दिया
हो जैसे,किसी मालगुजार ने--।
सूर्य की किरणें,ग्रीष्म ऋतु में--
अपने ताप से,झुलसाती रहती,
फिर भाये,शीतल पेय,ठंडी-ठंडी छाँव,
और सुखदायी लगे,कूलर की हवा रे -।
सूर्य है,ऊर्जा का संवाहक--
इसके बिन जीव-जन्तु व वनस्पतियों,
का,हो जाता है,जीना दूभर--
यही बनती है,जैव -विकास की धुरी-।
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व्याख्या--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि मानव जाति के लिए सूर्य की किरणें बहुत ही जरुरी है और सभी जीवों व वनस्पतियों के लिए भी ।
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