संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ.ग.)
विषय-योग्यता
दिनाँक-03.12.20
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*योग्यता*
योग्यता के बल पर
आगे बढ़ते जाते हैं,
टूटकर बिखरते नहीं ,
पर्वतों पर चढ़ते जाते हैं।
कोई अगर-मगर नहीं,योग्यता
के डगर पर बढ़ते जाते हैं,
सहारे की उम्मीद नहीं
स्वंय सहारा बन जाते हैं।
पैसे और पद की पूजा
नहीं होती है यहाँ,
योग्यता के ही पाँव
सदैव पूजे जाते हैं।
गर योग्यता नहीं तो पैसा
और पद दोनों छीने जाते हैं,
काबिलियत के बल पर
बुलन्दियों को छूते जाते हैं।
संयम,धैर्य संग आत्म
विश्वास भी नजर आते हैं,
क्या सही है जग में
विवेकशील बतलाते हैं।
अफसोस मगर जग में
पद और पैसे पूजे जाते हैं,
एक एकलव्य ने अँगूठा कटाया,
अब तो गर्दन काटे जाते हैं।
व्याख्या :-प्रस्तुत कविता में योग्यता
के बल पर आदमी आगे बढ़ते
जाते हैं।पर्वतों पर चढ़ जाते हैं
योग्यता के बल पर पूजे जाते हैं।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)
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