Monday, December 21, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- ममता

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- कविता 
शीर्षक -"ममता"
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मां की ममता निराली 
ठंडी में गर्म चाय की प्याली 
तपती धूप में मानो जैसे 
ठंडी नीम की डाली ।

बच्चे का हर कार्य माता 
बड़े जतन से करती 
अपने जीवन का हर क्षण 
बच्चों पर न्योछावर करती ।

बच्चा सोता आराम से 
मां करती जब रखवाली
बच्चे का रोना सुनकर 
ममता की दूध बहाती ।

हर कष्ट सहकर भी 
नन्हे को पालती-पोषती
किसी से कोई शिकवा नहीं 
चेहरे पर मुस्कान सजाती ।

संसार को गढ़ने वाली
माता का श्रृंगार है ममता
बिन ममता माँ नहीं
माँ बिना सारा जगत है खाली ।

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