स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -"ममता"
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मां की ममता निराली
ठंडी में गर्म चाय की प्याली
तपती धूप में मानो जैसे
ठंडी नीम की डाली ।
बच्चे का हर कार्य माता
बड़े जतन से करती
अपने जीवन का हर क्षण
बच्चों पर न्योछावर करती ।
बच्चा सोता आराम से
मां करती जब रखवाली
बच्चे का रोना सुनकर
ममता की दूध बहाती ।
हर कष्ट सहकर भी
नन्हे को पालती-पोषती
किसी से कोई शिकवा नहीं
चेहरे पर मुस्कान सजाती ।
संसार को गढ़ने वाली
माता का श्रृंगार है ममता
बिन ममता माँ नहीं
माँ बिना सारा जगत है खाली ।
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