रचनाकार-एच-एस-अरमो ,अरमान ।
निवास-बायरन बाजार,रायपुर छ.ग.।
जिला-रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
विषय-""ममता """ ।
विधा- छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक-"" ममता ""।
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●●●●||••ममता••||●●●●
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सँसार में बना रहे---
ममता का सागर -भाव,
हर एक से,जुड़ जाये सहजता से,
माँ की ममता होती है महान्--।
जहाँ हर रिश्तों में हो ममता--
चाहे इंसा हो या जानवर--
अपनी सन्तानों को वो पालता,
दुलारता और संवारता है सदा--।
जो हो जाते हैं,समय के साथ--
अनाथ,प्राकृतिक आपदाओं के नाम,
या सामाजिकता के नाम--
वो तरसते रहते सदा ममता की चाह-।
हर नवसृजन में---
छिपा होता है--
एक अनुरागी भाव --
ममता लिए,लालसा के साथ--।
सेवा भाव में छिपी होती---
एक आत्मीयता व अपनापन,
और प्रस्फुटित होता है--
ममता का स्नेहिल वो भाव--।
आओ ममतामयी मर्म-गाथा--
के महत्व को,हम जानें--
ये गहरे जख़्म में होते --
शीतल मलहम की तरह--
जैसे --सिध्दार्थ ने,हँस को दिया था ।
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व्याख्या-उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि ममता की जरूरत है सभी के लिए और इसके बिना जीवन अधूरा सा हो जाता है ।
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