जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-ममता
विधा-कविता (मुक्त छंद)
जिनकी दुआ से लोगों को आसमान छुते देखा है ।
हर दुख को नन्हें बच्चे को
सहसा चुप होते देखा है ।
जाने कौन- सा जादू है उनकी
गुनगुनाते हुए लोरी में,
बीमार बच्चे को भी गहरी नींद
सोते हुए ही देखा है ।
आंँचल जिनका आसमां से भी
बड़ा लगता है सदा,
जिनकी ही ममता की छांव में,
प्यार को पलते देखा है ।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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