Monday, December 21, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- ममता

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-ममता
विधा-कविता (मुक्त छंद)

जिनकी दुआ से  लोगों को आसमान छुते देखा है ।
हर  दुख को  नन्हें बच्चे को
सहसा चुप होते देखा है ।

जाने कौन- सा जादू है उनकी
गुनगुनाते  हुए लोरी में,
बीमार बच्चे को भी गहरी नींद
सोते हुए  ही देखा है ।

आंँचल जिनका आसमां से भी
बड़ा लगता है सदा,
जिनकी  ही ममता की छांव में,
प्यार को पलते देखा है ।

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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