Monday, December 21, 2020

नलिनी बाजपेयी की रचना- ममता

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,जिला-कांकेर ,(छ. ग.)
 विषय-ममता,दिनाँक-21.12.20

         *माँ की ममता*
हवाओं तुम यूँ ही,सदा बहती जाओ,

मातृ-यश का परचम यूँ ही,सदा फहराती जाओ।

ममता का सागर माँ तुम,मैं बूंदों का एहसास हूँ,

रवि किरणों का शौर्य तुम,मैं नन्हा सा रश्मि प्रकाश हूँ।

धरा के जर्रो की सोंधी गन्ध माँ, मैं तुम्हारे कदमों की पदचाप हूँ,

कानन में माँ सौरभ डूबी, मैं कलियों का एहसास हूँ।

बादलों में माँ सौदामिनी, मैं घटाओं का आगाज हूँ,

बहती शीतल सरिता माँ,मैं लहरों के आभास हूँ।

चाँदनी रात माँ धवल चाँद, मैं तारों का टिमटिम प्रकाश हूँ,

जेठ दुपहरी में माँ शीतल छाँव,मैं तुम्हारे आँचल की खास हूँ।

बागों का मधुमास माँ, मैं तुम्हारी मृदु एहसास हूँ,

ठुकरा ना देना कभी माँ, रहता हरदम तुम्हारे पास हूँ।


*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में माँ की महिमा और माँ की ममता का बखान किया गया है।

          नलिनी बाजपेयी
    संबलपुर, कांकेर,( छ. ग.)

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