संबलपुर,जिला-कांकेर,(छ. ग.)
विषय-दृष्टिकोण
दिनाँक-04.12.20
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*दृष्टिकोण*
बीते पलों को भूले,
आओ नवनिर्माण करें,
रूठ गए जो मंजर क्योंकर
उनको याद करें।
कल क्या होगा,किसने देखा,
तत्क्षण की हम बात करें,
जीवन में बुलन्दियों को छूने
का भरसक प्रयास करें।
जीवन बने उदात्त,नए
दृष्टिकोणों का आगाज करें।
चाहे कितनी बाधाएं आएं,
आगे बढ़ने का ऐलान करें।
तुम मनु के हो सन्तान,
भरत भूमि की शान,
शक्ति और बुद्धि के बल पर
अपनी दृष्टिकोण महान करें।
फूलों सा सुरभित हो जीवन,
महक उठे सारा कानन ये भाव भरें,
प्रखर रवि किरणों सा आलोक
जग में भरने का स्वप्न साकार करें।
*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाने की बात कही गई है।नए भाव,नए विचार भरने की बात कही गई है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)
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