जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-दृष्टिकोण
विधा-कविता (मुक्त छंद)
जब दृष्टिकोण बदल जाता है तो,
जीवन शैली बदल जाता है|
सकारात्मक विचार ही इंसान को
इंसानियत सिखा जाता है|
डाकू से मनुज बने जब वाल्मीकि,
रामायण की रचना कर पाये|
शस्त्र त्याग कर कलिंग के राजा,
सम्राट अशोक बन पाये||
सादगी से साध सके थे कलाम
मिशाइल मेन बन पाये|
अच्छे दृष्टिकोण से ही संविधान
बाबा साहेब लिख पाये||
दृष्टिकोण बदल कर जग में इंसान
सफल हो जाता है|
पदचिह्न बनता मील का पत्थर
नाम अमर हो जाता है|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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