जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग. )
विषय - दृष्टिकोण
शीर्षक - दृष्टिकोण
विधा - छंद मुक्त कविता
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// दृष्टिकोण //
केवल आँख से ही नहीं ,
मन , बुद्धि , विचार , मान्यता और भावना से
बनती है दृष्टि व दृष्टिकोण
जो कि
परिवार , समाज एवं धर्म की
मर्यादा है , सार्थकता है ।
एक लड़की या महिला
किसी की
बहू , पत्नी , सहेली , चाची , मामी , बुआ
आदि अनेक रिश्ते होते हैं
स्वस्थ दृष्टिकोण की वजह से ।
इसी प्रकार
एक सोने की अंगूठी
ग्राहक , सुनार , चोर एवं नन्हे बालक की दृष्टिकोण में
सर्वथा भिन्न अनुभव होगा ।
अर्थात्
यह दृश्यमान जगत
आधारित है
दृष्टिकोण पर ।
जैसे
दुर्योधन को सभी नगरवासी
दुर्जन प्रतीत होते थे
और युधिष्ठिर को
सज्जन लगते थे
वे ही लोग ।
यह सब अन्तर है
दृष्टिकोण का ।
इसीलिए दृष्टिकोण को
श्रेष्ठ और महान बनाना होगा ,
तभी बन पाएँगे हम भी
श्रेष्ठ और महान ।
दृष्टिकोण की
बलिहारी है ।
दृष्टिकोण को बदलिए ,
जीवन को सँवारिये ।
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