जिला - बालोदा बाजार (छ. ग.)
विषय - आधुनिकता और छायावाद
विधा - मुक्त छंद ( कविता )
शीर्षक - कविता के दो स्वरूप
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// कविता के दो स्वरूप //
( १ )
कटु यथार्थ का चित्रण हो ,
एकदम खुला भयानक ।
अच्छी बुरी सभी बातें ,
जो समाज में व्यापक ।।
आधुनिकता की शैली ,
सीधा करे प्रहार ।
विद्रोही भावों की रचना ,
लेखनी का व्यापार ।।
हास्य फुहड़ता टाइम पास ,
कविता की गरिमा खोई ।
आधुनिकता के नाम पर ,
मानो कविता विज्ञापन हुई ।।
( २ )
प्रकृति का हो मानवीकरण ,
और कल्पनाशीलता ,
अपने मन की अभिव्यक्ति ,
साहित्यिक लाक्षणिकता ।।
प्रेम अलौकिक रहस्यमय ,
अद्वैतवाद का दर्शन ।
छायावाद की पहचान है ,
यथार्थ से पलायन ।।
किन्तु कविता हुई परिष्कृत ,
मानवीय विचारों की ऊँचाई ।
आत्मा और परमात्मा दोनों ,
एक दूजे की परछाई ।।
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