स्थान---नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला---जांजगीर-चाम्पा छत्तीसगढ़
विधा---कविता/आलेख
विषय-आधुनिकताऔर छाया वाद
छायावाद की चमक ,आधुनिक काल में भी है ।
आज भी उसी का उत्तर, और सवाल भी है ।
नारी के महत्व पर, रचनाएं हैं सृजित ।
उन पर अत्याचार, करना है वर्जित ।
नारी अबला नहीं, पास जन्म जाल भी है ।
उसी का वृक्ष यहां,उसी का डाल भी है।
मानव का दृष्टिकोण, बदलने का विचार है ।
मानव जाति के लिए, करता खुशहाल भी है ।
नदियां गीत गाती है,वह भी चलते चलते ।
जिसे सम्पूर्ण सृष्टि सुनती, साथ में राग मिलते ।
मेघ देखते स्वप्न जगते , जिसमें कमाल भी है ।
भूख गरीबी महंगाई, पनपते बेरोजगार ।
जनता जनमत गणतंत्र, कल कारखाने ।
रोटी की कीमत श्रम,जगह जगह हड़ताल भी है ।
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