पेंडरवानी ,बालोद,छत्तीसगढ़
कविता
शीर्षक - भाग्य निर्माता : शिक्षक
अंधकार से उबार कर ,
जीवन में प्रकाश फैलता है ,
कभी डॉट - डपट से गढ़ता हमको ,
कभी स्नेह- प्रेम से सहलाता है ,
भाग्य निर्माता , पथ प्रदर्शक ,
जग में शिक्षक कहलाता है ,
असफलता जीवन का हिस्सा ,
पग - पग आता - जाता है ,
गुरु के कहने पर धैर्य धरे जो ,
सफलता एक दिन वो पाता है ,
निराशा में विचलित मन को ,
उम्मीदों से बहलाता है ,
भाग्य निर्माता ............
कच्चे मिट्टी से बालक को ,
मजबूत बुनियाद बनाता है ,
खरा - खोटा न जाने वो ,
बस निखार सोने सा लाता है ,
अनगढ़ , मूढ़ , अमूर्त मन को ,
शिक्षा अमृत से नहलाता है ,
भाग्य निर्माता .............
राम - कृष्ण की धरती में ,
वशिष्ठ - संदीपनी महान हुए ,
जिनकी आज्ञा से मनुज अवतारी ,
कर्मपथ पर चल भगवान हुए ,
धर्मपथ पर अडिग ही ,
उदाहरण बन दिखलाता है ,
भाग्य निर्माता ..........
तुलसी , सूर महारानी मीरा ,
गुरु कृपा से ही महाज्ञानी ,
सद्गुरु संगत अभ्यास भजन से ,
जान गए उस अवघट दानी ,
करनी का मारग सतगुरु जान ही ,
कबीर , कबीर कहलाता है ,
भाग्य निर्माता , पथप्रदर्शक ,
जग में शिक्षक कहलाता है ,
- - शैलेन्द्र कुमार चेलक - -
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