सुंदरगढ़, ओड़िशा
विधा-कविता
विषय-शिक्षक
शीर्षक-भाग्य-विधाता
दे ज्ञान का प्रकाश पुंज
घर-घर अलख जगाता
अपने संचित ज्ञान से
कहलाता देश का निर्माता
शिक्षक है वो भाग्य -विधाता
सही गलत में फर्क हमे सिखाता
धर्म -अधर्म का भेद बताकर
सही राह है हमे दिखाता
है राष्ट्र का मार्गदर्शक शिक्षक
जीवन भी उसका दर्शन जैसा
अपनी शिक्षा, प्रेम के दमपर
हृदय परिवर्तन भी कर देता
शिक्षक का व्यवसाय नही शिक्षा
कर्तव्य उसका बन जाता
यही पद में रहकर वह
आजीवन सम्मान है पाता।
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