Monday, December 28, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- चौपाल

नाम--- गिरधारी लाल चौहान
स्थान--- नवापारा खुर्द/ सक्ति
विधा--- कविता /आलेख
विषय ---चौपाल
शीर्षक-बदल चुके चौपाल

धीरे धीरे चौपाल हमारे,,अस्त होते जा रहे हैं ।
चौपालों ने जो दिया,उसी को बता रहे हैं ।

एक समय ऐसा था, मुहल्ले के सभी लोग बैठा करते थे ।
सामान्य बात भी होती थी,या समस्या पर चर्चा करते थे ।
इने गिने क्षेत्रों में ही,ये रीतियां अपना रहे हैं ।

आधुनिकता के नाम पर,इसका परदा गिर गया ।
लोगों ने खुद को समेट लिया, नाम बाकी है मिट गया ।
अब दिग्गज नेताओं के चर्चों को इस रंग से रंगा रहे हैं ।

हर समस्या का होता था समाधान, बुजुर्गों के अनुभव बटते थे ।
कोई कष्ट ऐसा नहीं जो उनकेकिए इशारों से न कटते थे ।
आज नाम से सभी परिचित, उसका प्रसाद पा रहे ।

आज पढ़ लिखकर लोग, अपने कर्मों तक सीमट गए ।
या यो कहिए रोजगार की तलाश में जीवन से भटक गए ।
कोई घर में घुसा कोई भटकता अपने आपको दिखा रहे हैं ।

हो जाए आज भी चौपाल,तो सारे विश्व को फिर देखना  ।
हर कोई हो जाएगा खुशहाल, मेरे लिखे कविता को सोचना ।
अपने अपने रागों के गीत बंद हो जाएंगे जो बना रहे हैं ।

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