जिला-कांकेर,छग
शीर्षक- मोचो बस्तर
विधा- कविता (मुक्त छंद)
मोचो बस्तर कितरो सुंदर,
आनी -बानी के बोली इहां।
हल्बी,भतरी अऊ गोंड़ी ।
एशिया परसिद्ध 75 दिन के
एतिहासिक दशहरा इहां,
दंतेश्वरी अाराध्या सबके ।
हुल्की,मांदरी,गौर नृत्य हे,
लक्ष्मी जगार ,जात्रा इहां,
जम्मों देवता धामी जिहां।
शाल के दीप कहे जाथे ऐला
संसार के नियाग्रा घलो इहां,
अऊ टाइगर प्रोजेक्ट जिहां।
बस्तर बियर सल्फी मिलथे
चेपोडा के चटनी इहां के हे
शहद अऊ इमली परसिद्ध।
घोटुल,नर नारायण मेला अऊ
बारसूर के ममा- भांचा मंदिर,
दंतेवाड़ा के मां दंतेश्वरी इहां।
हरियाली के परतीक बस्तर,
दण्डकारण्य प्राचीन नाम हे,
राम बिताइन बनवास इहां।
आनी बानी के अयस्क,अभ्रक
काोरंडम,लोहा के खदान इहां,
बैलाडिला लौह नगरी हे जिहां।
लाला जगदलपुरी,शैनी जैसे,
बड़े-बड़े साहित्यकार इहां,
बस्तर ल देइन पहिचान नवा।
इन्द्रावती ,महानदी के संग
कुटुमसर,सात धार अऊ चर्रे-
मर्रे मलांजकडुम प्रपात इहां।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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