जिला :- महासमुंद
विषय :- छत्तीसगढ़ के संत
विधा:- कविता
शीर्षक :- छत्तीसगढ़ के संत
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पूत अनूठे मंहगूदास के,
अमरौतिन के दुलारे थे।
पंथ दिखाया सतनाम का,
जन जन के नयन के तारे थे।
सत्य अहिंसा के वे पुजारी,
सत्य राह जग को दिखलाया।
मातृभूमि की सेवा करके,
पूत धर्म जिसने निभाया।
कहा बाबा ने जग को नित ही,
धैर्यवान ही सच्चा वीर।
सदा पीर का भोगी वह ही,
जिसका मन है बड़ा अधीर।
संदेश अनुपम बाबा का,
त्यागो हे मनु मांसाहार।
सेहत सुधर जाएगी सुनलो,
नित स्वीकारो सखा शाकाहार।
छत्तीसगढ़ के संत अनूठे,
बड़ी अनूठी उनकी सीख।
सादगी का मार्ग दिखाया,
चमक बिखेरे रवि सरीख।
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