रचनाकार-एच-एस-अरमो, अरमान ।
निवास 'बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
विषय-" विवाह " ।
विधा-कविता,छ्न्द मुक्त ।
शीर्षक- " विवाह " ।
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$||••विवाह ••||$
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समाज ने बनाया है---
विवाह नाम का,एक पवित्र रिश्ता ।
जिसमेँ हम चुनते,जीवन साथी,
लेते सात फेरे और बन्ध जाते--
जीवन भर के लिए--।
पौराणिक कथाओं में--
हुआ करते थे--
स्वयंवर व गन्धर्व विवाह--
और समय के साथ बदले,
आज इनके रीति-रिवाज --।
बाल विवाह थी,एक कुप्रथा---
इस प्रथा के,रोकथाम करने,
बनाये हैं,कड़े कानून--
जिसका,हमें पालन करना होगा--।
एक नया नाम,लव-जिहाद है--
सँस्कृति पर,चोट करता है-
सभी युवाओं को,ध्यान रखना होगा,
विवादों में,न पड़कर,सामाजिकता का,
निर्वहन कड़ाई से पालन करना होगा।
एक बाला ,सजनी बनने--
रहती है,कितने बेताब,
नाना प्रकार के,सपने सजाती,
विवाह होते ही,पराई कहलाती ।
आज फैशन व मोबाईल के शौक ने,
दोनों के,नौकरी करने से,
साथ साथ रहना हो गया है दूभर,
कई शिकवा गिला होते रहते,
और मनमुटाव इतना,गहरा होता,
कि,सिर्फ तलाक ही,हल होता--।
विवाह के पवित्र रिश्ते को--
पाश्चात्य संस्कृति का,ग्रहण लगा,
आज सामाजिक परम्परा को,
इतना,अनदेखा करते हैं और
अजीब से,रिश्ते में रहा करते,
विवाह की पवित्रता में दाग लगाते--।
आओ हम तुम मिलकर--
विवाह जैसे,खूबसूरत रिश्ते की,
पवित्रता और महत्व को बनाये रखने ,
युवक-युवतियों में,जीवन-सुख की,
राह दिखाने,सामाजिक सरोकारों से,
सँस्कृति और धर्म की गहराइयों को,
समझाने की कोशिश कर जाएँ-।
सभी धर्मों का सम्मान करो--
विवाह के कार्यक्रम होते हैं,
जाति,धर्म,क्षेत्र और सँस्कृति के,
अनुसार,इस अवसर में,उपस्थित हो,
वर-वधु को शुभकामनायें दे आयें--।
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व्याख्या-उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि विवाह एक समाज की जरूरत है और परंपरा है ।जिसके कारण सँसार में नवसृजन की प्रक्रिया चलती रहती है और देश,जाति,धर्म के अनुसार विवाह संस्कार को बचाये रखने का एक प्रयास है ।
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