ग्राम -बुलाँकी
जिला- रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
विधा -कविता
विषय -"विवाह"
दिनांक -08/12/2020
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*विवाह*
दो शरीर एक मन को ,
शादी कहा जाता है ।
ऐसे संबंधों में जीने वालों को ,
विवाह का दर्जा दिया जाता है।
विवाह का अर्थ है प्यारे ,
मूल्यों का संवहन करना।
संबंधों को पहचान कर,
सदा भावों के साथ जीना।
विवाह का प्रयोजन है प्यारे ,
वंश परंपरा बनाए रखना।
परिवार में सुख -समृद्धि बना रहे,
सुनियोजित हो व्यवस्था में जीना।
विवाह की मर्यादायें होती है,
इस मर्यादा को बनाए रखना।
मर्यादा कभी उल्लंघन ना हो,
विवाह संबंधों को बनाए रखना।
विवाह दो आत्माओं का मिलन,
इस मिलन को बनाए रखना ।
पति -पत्नी संबंध कभी न छूटे,
हमेशा विश्वास बनाए रखना।
विवाह सामाजिक संस्कृति है,
इस संस्कृति का लाज रखना।
एक दूसरे के प्रति प्रेम बना रहे,
ऐसे भावनाएँ बनाए रखना।
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उर्मिला सिदार रायगढ़ छत्तीसगढ़
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