जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विधा - कविता
शीर्षक - " शिक्षक की महिमा "
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गुरुवर....
आपकी महिमा का मैं,
हर पल करूँ बखान l
ज्ञान के सागर आप ही,
मैं बालक नादान l।
पथ प्रदर्शक मेरे जिंदगी के,
मन में उजियारा जो लाते l
अज्ञान की अंधेरा मिटाकर,
दिल में प्रकाश जगाते l
करूँ मैं हमेशा आपका सम्मान l
मैं बालक नादान ll
भगवान और गुरुवर जब,
मेरे सामने आ जाते l
शीश मेरे गुरु चरणों में,
पहले ही झुक जाते l
करूँ मैं उनको प्रणाम l
मैं बालक नादान ll
जन्म दिया माँ बाप ने मुझे,
सेवाभाव आप सिखाते l
काली अंधेरी रात में,
सवेरा बन मेरे आते l
आप ही करुणा निधान l
मैं बालक नादान ll
समाज,संस्कार की बात सिखाते l
सत्य की राह पर चलना सिखाते l
दूर किए मन का अज्ञान l
मैं बालक नादान ll
भूलना ना अहसान गुरु के,
काबिल जो हमें बनाते l
प्रेम प्रीत का पाठ पढ़ाकर,
नफरत भाव से हमें बचाते l
महिमा कैसे करूं मैं बखान l
मैं बालक नादान ll
मैं बालक नादान ll
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मौलिक रचना ( स्वरचित )
संतराम कुम्हार
बलौदाबाजार (छ.ग.)
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