जिला _राजनांदगांव छ,ग,
विधा_कविता *गुरु ज्ञान*
विषय_शिक्षक
अज्ञानता दूर कर गुरु ज्ञान उर में भरते हैं।
नन्हे बच्चों के जीवन कुम्हार बन गढ़ते हैं।
ज्ञान दान कर सदा अंधियारे जीवन में,
नव प्रकाश भर सुनहरे भविष्य गढ़ते हैं।
गुरु राष्ट्र निर्माता जगत खेवनहार होते हैं।
डगमगाती जीवन नैया के पतवार होते हैं।
गुरु ज्ञान बिन जग अंधियारा है सदा,
गुरु ज्ञान ही भव से बेड़ा पार करते हैं।
गुरु ही सफलता का मूल मंत्र बताते हैं।
अंधकार मिटाने गुरु दीपक सा नित जलते हैं।
सूर, तुलसी, नानक, कबीर जैसे गुरु ही,
पथ प्रदर्शक बन सदा नये शिष्य गढ़ते हैं।
ज्ञानदाता गुरु की महत्ता को पहचानो।
गूढ़ ज्ञान को नित आचरण में उतारो।
निगुरा ज्ञान हिन भटकना नहीं जहाँ में,
अंतस में मर्मज्ञ गुरु ज्ञान को धारों।
पद्मा साहू "पर्वणी"
खैरागढ़
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