स्थान--नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला -जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
विधा-कविता
विषय--शिक्षक
शीर्षक-शिक्षक
शिक्षक होते हैं सूरज, अपने इस समाज के ।
पग -पग होती है पूजा, उनके किये काज के ।
अज्ञानता उनके हाथों, जैसे भी हो मिट जाती ।
जिन पर उनका नजर पड़े,धन्य जीवन हो जाती ।
अधिकारी हर पल होते, सदा सम्मानित ताज के ।
सदमार्ग पर चलते चलाते, परहित का सूत्र बताते ।
जिस मार्ग पर चल प्राणी,सकल पदारथ को पाते ।
न निर्धन से दूरी इनका,न करीब महाराज के ।
सबका भाग्य वह लिखे,दौलत से न वह बिके ।
ज्ञान से सबका मन जीते, भले जीवन जैसे बीते ।
आजीवन मानव सेवा,करता वह बिना स्वार्थ के ।
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