Tuesday, December 1, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- शिक्षक

नाम---गिरधारी लाल चौहान
स्थान--नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला -जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
विधा-कविता
विषय--शिक्षक
शीर्षक-शिक्षक

शिक्षक होते हैं सूरज, अपने इस समाज के ।
पग -पग होती है पूजा, उनके किये काज के ।

अज्ञानता उनके हाथों, जैसे भी हो मिट जाती ।
जिन पर उनका नजर पड़े,धन्य जीवन हो जाती ।
अधिकारी हर पल होते,  सदा सम्मानित ताज के ।

सदमार्ग पर चलते चलाते, परहित का सूत्र बताते ।
जिस मार्ग पर चल प्राणी,सकल पदारथ को  पाते ।
न निर्धन से दूरी  इनका,न करीब  महाराज के ।

सबका भाग्य वह लिखे,दौलत से न वह बिके ।
ज्ञान से सबका मन जीते, भले जीवन जैसे बीते ।
 आजीवन मानव सेवा,करता वह बिना स्वार्थ के ।

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