Monday, December 28, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- चौपाल

रचयिता- मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-चौपाल
विधा-कविता( मुक्त छंद)

 गांव अब शहर बन गये,
 चौपाल के दिन ढह गये।

 जमती थी पीपल,बरगद
 नीम के पेड़ तले चौपाल।

 चिडि़यों की वो चहचहाहट 
 बच्चे-बूढ़े की वो  जमघट।

जमाने भर की सारी खबरें,
संवदिया बिना रुके कहता ।

हंँसी-ठिठोली अलाव जलाना,
ठिठुरते सुरती-पान चबाना।

सुनसान हो गये सब चौपाल,
करोना - कहर बना जंजाल।

आओ अब चौपाल को बचाएं,
पुरातन धरोहर को  हम लौटाएं।

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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