Monday, December 28, 2020

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- चौपाल

रचनाकार- अनुरमा शुक्ला
स्थान - दुर्ग (छ.ग.)
विधा- कविता
शीर्षक-

*गुम हुए चौपाल*

डिजिटल है ये दुनिया
रिश्ते भी कुछ ऐसे ही
निभाये जा रहे हैं
ऑनलाइन शब्दों से ।

ये हँसी ठिठोली
ज्ञान विज्ञान की बात
बनावटी रिश्तों मे
उलझते जज़्बात ।

       फिर भी ...
    ना जाने क्यों
  खोजती हैं आँखे
  वो अपना सा गाँव
  बड़ी सी चारपाई में
    बुजुर्गो का रौब 
    पीपल की छांव
         और
   फुर्सत के पल में
   जमती चौपाल ।

.................................…

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